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23/02/2024 Neelesh Sharma General Views 70 Comments 0 Analytics Video English DMCA Add Favorite Copy Link
Movie Review: संवेदनशील मुद्दे पे बनी है फिल्म Article 370, Yami और Priyamani की अदाकारी की खूब हो रही है तारीफ
मशहूर निदेशक आदित्य धर ने सत्य घटना पर आधारित एक और फिल्म आर्टिकल 370 का निर्माण किया है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने की घटनाओं से आम जनता भली भांति परिचित हैं। लेकिन इस धारा को हटाने से पहले क्या-क्या तैयारियां हुई थी, वह सब इस फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है। यह फिल्म जम्मू-कश्मीर से Article 370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख दोनों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के प्रधानमंत्री कार्यालय के टॉप सीक्रेट फैसले पर आधारित है। फिल्म की कहानी एक खुफिया अधिकारी जूनी हक्सर से शुरू होती है। जूनी हक्सर को आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी के ठिकाने के बारे में पता चलता है और वह उसे मुठभेड़ में मार देती है। इस घटना से कश्मीर में पत्थरबाजी शुरू हो जाती है और इस घटना के जिम्मेदार जूनी हक्सर को मानकर दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जैसे ही सरकार अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की दिशा में आगे बढ़ती है। PMO के सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन अपनी एक टीम का गठन करती है और कश्मीर में एनआईए ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए जूनी  हक्सर को  नियुक्त करती है। जूनी हक्सर घाटी में शांति और एकता बनाए रखने की यात्रा में भ्रष्ट स्थानीय नेताओं और उग्रवादियों द्वारा उत्पन्न बाधाओं से होकर गुजरती है।
इस फिल्म की कहानी को छह अध्यायों में बांटा गया है, जिसमें पहला अध्याय एक आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी की कहानी से शुरू होता है। 2016 में उसकी मौत के बाद घाटी में कई विरोध प्रदर्शन हुए, पत्थर बाजी हुई, जिसके बाद PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन हरकत में आ गई। कहानी फिर उस समय पर  पहुंच जाती है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है। इसके बाद भी  स्थिति ज्यादा नहीं बदलती और 2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद केंद्र सरकार हरकत में आई और जम्मू कश्मीर  के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने का फैसला लिया।
इस फिल्म में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने से पहले कैसे जम्मू-कश्मीर संविधान की जांच की गई है, उन खामियों की भी पहचान की गई है, जिससे अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में मदद मिली है। एक पुराने सरकारी पुस्तकालय से प्राप्त 1954, 1958 और 1965 के दस्तावेजों से महत्वपूर्ण चूक का पता चला, जिससे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को काफी पहले हटाया जा सकता था। इस फिल्म की कहानी आदित्य धर ने खुद मोनल ठाकुर के साथ मिलकर लिखी हैं। फिल्म के निर्देशक आदित्य ने फिल्म की कहानी के जरिये देशभक्ति की उत्तम भावनाओं को पर्दे पर पूरी तरह से पेश करने में सफल हुए हैं।
फिल्म की कहानी मुख्य रूप से दो ही किरदार जूनी हस्कर और पीएमओ सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन के इर्द-गिर्द घूमती है।  जूनी हस्कर की भूमिका में  यामी गौतम तथा PMO सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन की भूमिका में प्रियामणि का फिल्म में जबरदस्त प्रदर्शन रहा है। प्रधानमंत्री की भूमिका में अरुण गोविल और गृह मंत्री की भूमिका में किरन करमारकर की भूमिका काफी प्रभावशाली दिखी हैं। फिल्म के बाकी कलाकारों में राज जुत्शी, सुमित कौल, वैभव तत्ववादी, स्कन्द ठाकुर और इरावती हर्षे ने अपनी अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह से न्याय करने की कोशिश की गई है। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी, संकलन, बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है।
                             

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