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05/06/2024 Kajal sah Education Views 242 Comments 0 Analytics Video Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
भगवद गीता हमें क्यों पढ़ना चाहिए?
भगवदगीता को गीतोपनिषद भी कहा जाता है। यह वैदिक ज्ञान का सार है और वैदिक साहित्य का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपनिषद है। निसंदेह भगवदगीता पर अंग्रेजी भाषा में अनेक भाष्य प्राप्त हैं, अतएव एक अन्य भाष्य की आवश्यकता के बारे में प्रश्न किया जा सकता है। इस प्रस्तुत संस्करण का प्रयोजन इस प्रकार बताया जा सकता है: हाल ही में एक अमेरिका महिला ने मुझसे (प्रभुपाद ) के एक अंग्रेजी अनुवाद की संस्तुति चाही। निसंदेह अमरीका में भगवदगीता के अनेक अंग्रेजी संस्करण उपलब्ध, लेकिन जहाँ तक मैंने देखा, केवल अमेरिका ही नहीं, अपितु भारत में भी उनमें कोई पूर्ण रूप से प्रमाणिक संस्करण नहीं मिलेगा, क्युकी लगभग हर एक संस्करण में भाष्यकार ने भगवदगीता यथारूप के मर्म का स्पर्श किये बिना अपने को व्यक्त किया है।
भगवदगीता का मर्म भगवदगीता में ही व्यक्त है। यह इस प्रकार है : यदि हमें किसी औषधि विशेष का सेवन करना हो तो उस पर लिखें निर्देशों का पालन करना होता है। हम मनमाने ढंग से या मित्र की सलाह से औषधि नहीं ले सकते है। इसका सेवन लिखें हुए निर्देशों के अनुसार या चिकित्सक के निर्देशानुसार करना होता है। इस प्रकार भगवदगीता को इसके वक्ता श्री कृष्ण भगवान हैं।

आज इस निबंध माध्यम से यह जानने का प्रयास करेंगे कि हमें गीता क्यों पढ़ना चाहिए? गीता पढ़ने के प्रमुख कारणों के बारे में आज हम विस्तार से जानेंगे.. और महत्वपूर्ण कारणों को उदाहरण के साथ।

1. सार्थक मार्ग : जीवन का दूसरा नाम संघर्ष है। संघर्ष के दौर पर मनुष्य आंतरिक मन से टूटने लगता है। ऐसा लगता है कि मानो जीवन में सबकुछ खत्म हो गया है। इसी नकारात्मक विचारधारा और संघर्ष से लड़ने में गीता आपका साथ जरूर निभाएंगी।
भगगदगीता एक अनुपम, सौंदर्य और सार्थक महाग्रंथ है जिससे हमारे जीवन में ऊर्जा, उत्साह और उमंग का आगमन होता है.. अगर आप गीता को पढ़ते है और श्री कृष्ण ने जीवन के हर समस्या का हल गीता में उन्होंने बताया है। गीता में वह सशक्त शक्ति है.. जो हमें सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाता है। हमारे जीवन में महत्वपूर्ण और व्यर्थ क्या है.. यह हमें गीता पढ़ने से प्राप्त होता है  
उदाहरण : 2023 में कुछ भी जीवन में अच्छा नहीं चल रहा था। मैंने अपने जीवन बुरी आदतों को स्थान दे दिया था। लेकिन जून माह 2023 में मेरी मुलाक़ात पूजा से हुई। पूजा ने गीता को पढ़ा था। कुछ दिन उसके साथ मैंने बिताया। उसने मेरे समस्या को समझा और समाधान करने में मेरी पूरी मदद की। मैं तब समझ पाई क्या महत्वपूर्ण है और क्या व्यर्थ है।
कुछ आदतों को मैंने अपने जीवन से दूर किया :
1. मांस का सेवन बंद 
2. अन्य का बुराई और लड़ना - झगड़ना बंद 
3. सुबह थोड़ा जल्दी उठनें लगी 
4. नफ़रत, घृणा, जलन इत्यादि अवगुण दूर हुए 
धन्यवाद पूजा।
2. कर्म: मनुष्य और जानवर में अंतर यह है कि मनुष्य अपनी बुद्धि और कौशल का उपयोग करके सार्थक कर्म करने की क्षमता रखते है और लेकिन अन्य प्राणी नहीं।
गीता में भगवान हमें कर्म के बारे में बताते है। भगवान कहते है कि हम सभी का कर्तव्य केवल कर्म करने का है.. फल के चिंता किये बिना हमें कर्म करते रहना चाहिए।
भगवान आत्मा क्या है? उसका स्वरूप क्या है इत्यादि श्री कृष्ण हम सभी को समझाते है  
3. दुख :जीवन में सुख -दुख अनमोल साथी है। विवेकानंद जी अपनी पुस्तक व्यक्तिगत विकास में लिखते है कि सुख अपेक्षा दुख साथी है। कहते है ना कि आज आप जितना दुख से लड़ेंगे.. संघर्ष करेंगे.. उतने ही आप निखरते है। गीता एक पवित्र ग्रंथ जहां श्री कृष्ण हमें दुखों से मुक्ति प्राप्त करने का मार्ग दिखलाते है। दुखों का कारण क्या है? दुखों से लड़ने का सशक्त उपाय.. श्री कृष्ण हमें बताते है।
गीता में जीवन के हर समस्या का निवारण मिलता है। यही कारण है कि गीता विश्व विख्यात है। भारत के अलावा विभिन्न देशों में पढ़ाया जाता है।
4. शांति :जीवन प्रवाह पूर्ण है। जीवन में सुख और दुख दोनों प्रवाह करती है। हम सभी के जीवब का प्रमुख उद्देश्य क्या है? हम सभी अपने जीवन को शांति से जीना चाहते है। यकीन मानिये जब गीता को पढ़ना स्टार्ट करते है और श्री कृष्ण जी के महत्वपूर्ण बातों को अपने जीवन में आत्मसात करते है.. तब आप जीवन में आये समस्याओं का सामना निडरता और धैर्य से करते है। जी हाँ.. जीता में इतनी शक्ति है। खुश रहने के अचूक उपाय, मन को नियंत्रित कैसे कर सकते है इत्यादि।
उदाहरण :जब मेरी मुलाकत पूजा से हुई। तब उसे बात करके.. उसके साथ रहने से मेरे जीवन में सकारात्मक प्रभाव आने लगा। पहले  बहुत चिल्लना, गलत शब्दों का उपयोग, लड़ना इत्यादि। इन सभी के वजह से मैं आशान्ति जीवनयापन कर रही थी। लेकिन धीरे - धीरे जीवन में शांति आने लगी.. पूजा से मिलने के बाद। जब यह बात मैंने पूजा को धन्यवाद कहा.. तब उसने कहा श्री कृष्ण को धन्यवाद करो.. क्युकी उनके उपदेश को ही मैंने तुम्हारे साथ साझा किया। और तुमने अपने जीवन में अप्लाई किया... इसलिए बदलाव हुआ।
5. प्रेम : गीता प्रेम, साहस और हर्ष से पूर्ण ग्रंथ है। जिससे पढ़ने से मन प्रफुल्लित और जीवन सार्थक बन जाता है। वास्तव में प्रेम क्या है? प्रेम का परिभाषा क्या है? दया एवं करुणा क्या है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर आपको गीता से मिलता है।
अगर किसी व्यक्ति को किसी के तन, चेहरे से प्रेम है.. तब वास्तव में यह प्रेम नहीं.. यह कामवासना है.. यह आकर्षण है.. यह मोह - माया है।
प्रेम " स्वतंत्रता का प्रतीक " है। गीता के माध्यम से आप एक दयालु इंसान बन पाते है। दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए... इत्यादि हर नैतिक गुण आप गीता के माध्यम से सीख पाते।
गीता में वह सशक्त शक्ति है.. जिससे आपके सारे अनैतिक अवगुण सर्वनाश हो जाते है।
6. सत्य : आज हम सभी ऐसे युग में जीवन जी रहे है.. जहाँ झूठ राजा और सच्चाई रंक है। लेकिन इस दुनिया में हमें नहीं शामिल होना है। आपको इस युग में शामिल नहीं होना है। आपको हमेशा सत्य अर्थात जो सच है.. वही बोलना है और सच ke राह पर हमेशा आगे बढ़ना है।
7. आत्मविश्वास एवं आत्मज्ञान :गीता ज्ञान का भंडार और जीवन के हर समस्याओं को निदान करने का प्रियतम उपहार है। गीता में श्री कृष्ण विभिन्न ऐसे श्लोक कहते है.. और अर्जुन के प्रश्नों के उत्तर देते है.. जिससे हम सभी को अपने जीवन के समस्याओं का समाधान मिल जाता है।
गीता में वह सशक्त शक्ति है.. जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। गीता के माध्यम से हम सभी स्वयं का आत्मनिरीक्षण कर पाते है।हम जितना स्वयं को जानते है.. हम स्वयं के बारे में अच्छे से विश्लेषण कर पाते है। अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करते है। जिससे हमारा आत्मज्ञान और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
हम सभी को स्वयं पर विश्वास करना चाहिए। अपने क्षमता पर.. अपने सपनों पर.. अपनी मेहनत पर।
# इच्छा : मन बड़ा गतिशील एवं चंचल है। एक लक्ष्य पर कभी भी केंद्रित नहीं रहता है। इन्द्रियों के सुख के पीछे भागने से कुछ नहीं होगा.. इन्द्रियों का पसंद - ना पसंद बदलते रहता है। हमारा जीवन का परम् एवं उत्तम लक्ष्य है ज्ञान। गीता हमें अपनी इच्छाओं पर नियंत्रित करना सिखाता है। ज़िन्दगी में ऐसी कई चीज़ें होती है जो हमारे लिए उचित नहीं। ऐसा इसलिए होता है.. क्युकी हमारा नियंत्रण हमारे इन्द्रियों पर नहीं है। गीता हमें यह सिखाती है.. अपने मन को नियंत्रित करना और संयम के साथ जीवन को जीना। जीवन में सार्थक कर्म करते रहना और जीवन को सार्थक बनाना।

कैसा लगा आपको? भगवत गीता हमारे जीवन का सार है। इसे जरूर पढ़े और अपने जीवन को जरूर बदले।
धन्यवाद 
काजल साह
                             

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