केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया, जिसके बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है। इसके बाद राज्यसभा में गुरुवार को इसे पारित करने को लेकर चर्चा की जाएगी। इस विधेयक को लेकर बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना और समाजवादी पार्टी सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। जहां एक ओर मुस्लिम समाज का एक हिस्सा इस बिल का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा हिस्सा इस बिल का विरोध कर रहा है।
विधेयक पर विपक्ष की ओर से तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संविधान के प्रति समर्पित है और भाजपा के लोग नागपुर का कानून थोपना चाहते हैं, जो उनके लिए स्वीकार्य नहीं है। तेजस्वी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ में विश्वास करती है और भारत की विविधता इसकी असली खूबसूरती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आरजेडी ने संसद के दोनों सदनों और बिहार विधानसभा में इस विधेयक का विरोध किया है और भविष्य में भी करेगी।
राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने वक्फ संशोधन विधेयक को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न तो मुसलमानों के खिलाफ है और न ही हिंदुओं के खिलाफ, लेकिन अगर हम अपने संस्थापक द्वारा आजादी के बाद दिए गए आश्वासनों से भटकते हैं, तो यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने वादों पर सच्चे रहें। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, जो किसी विशेष वर्ग को प्रभावित करता है, तो उस वर्ग को विश्वास में लेकर ही कानून बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस विधेयक के जरिए संविधान के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ है और इसका उद्देश्य देश में अशांति का माहौल पैदा करना है। गोगोई ने यह भी कहा कि ऐसे विधेयक देश की विविधता और सांस्कृतिक एकता को कमजोर करते हैं और समाज में विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिए यह बिल लाया जा रहा है, उनकी बातों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी नाइंसाफी है। अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा वह पार्टी है, जिसे जमीन से बहुत प्यार है। रेलवे और डिफेंस की जमीनें बेचने के बाद अब वक्फ की जमीनें भी बेची जाएंगी। यह सब भाजपा की असफलताओं को छिपाने की एक योजना है।
समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने भी इस विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार का अधिकार है कि वह कोई बिल या संशोधन विधेयक लाए, लेकिन यह विधेयक अनुचित तरीके से एक धर्म विशेष के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए लाया गया है। जावेद अली खान ने यह उम्मीद जताई कि भाजपा के सहयोगी दल, जो अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाए रखने के लिए चिंतित हैं, इस संवेदनशील मामले में सरकार का साथ नहीं देंगे।
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान के खिलाफ है और देश की अखंडता और एकता को खतरे में डालता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इसे पूरी तरह से विरोध करेगी। उनका मानना है कि यह विधेयक देश के लोगों के बीच एकता को कमजोर करेगा और समाज में विद्वेष पैदा करेगा।
कांग्रेस सांसद डॉ. मल्लू रवि ने भी इस विधेयक को मुसलमानों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल केंद्रीय सरकार और कलेक्टर की शक्ति को केंद्रीकृत करने के लिए लाया गया है। डॉ. रवि ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का पूर्णतः विरोध करती है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इस विधेयक को सुधार के नाम पर कुटिलता करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक प्रतिशोध की भावना से लाया गया है और इसका उद्देश्य सिर्फ सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे समुदायों को निशाना बनाना है।
भाजपा सांसद और JPC समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने वक्फ संशोधन विधेयक को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल देश के गरीब, पसमांदा और आम मुसलमानों के लिए लाभकारी होगा। पाल ने यह भी बताया कि भाजपा ने इस बिल को लेकर दक्षिण भारत का दौरा किया था और अब इसे संसद में पेश किया जा रहा है। उनका मानना है कि यह विधेयक उन लोगों के लिए लाभकारी होगा जो वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग कर रहे हैं।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने कहा कि यह बिल समाज के हित में है और इसका उद्देश्य किसी एक समुदाय को भड़काना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम जमातें देश के मुसलमानों को भड़काकर और झूठ फैला कर उन्हें हिंसा की राह पर धकेलने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियों को रोका जाना चाहिए और कानून को संसद में पास होने देना चाहिए क्योंकि यह सबके हित में है।
इस विधेयक को लेकर कई पक्षों से विवाद उत्पन्न हो रहा है, जहां एक ओर इसे सुधार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे सांप्रदायिक सौहार्द को कमजोर करने और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का हनन करने के रूप में देख रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा और राज्यसभा में इस विधेयक पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया सामने आती है और यह विधेयक आखिरकार किस रूप में पारित होता है।
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