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08/06/2024 Kajal sah Development Views 158 Comments 0 Analytics Video Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
शीघ्रता से कैसे याद रखे?
"यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता" 
यह कथन भारत के एक महान आध्यात्मिक गुरु, विचारक एवं ज्ञान के प्रबल समर्थक स्वामी विवेकानंद जी  का है। भारत से लेकर पुरे विश्व में जिन्होंने ज्ञान प्रसारित किया.. सनातन धर्म का मान पुरे विश्व में अलग पहचान जिन्होंने दिलाया.. जिन्होंने अपने मन पर नियंत्रण करके सर्वोपरि ज्ञान प्राप्त किया।
शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र व्यक्तित्व विकास एवं जीवन में सार्थक लक्ष्य प्राप्ति का साधन भी है।
आज इस निबंध के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी के लर्निंग टेकनीक को जानने का प्रयास करेंगे।
1. आत्मनिरीक्षण  : बड़ी दुख की बात है..आज हम दुनिया को बदलने के पीछे भाग रहे है। हम दूसरों से परिवर्तन की आस रखते है.. सबसे पहले। उसके बाद हम स्वयं को खड़ा करते है। क्या हमने जानने का प्रयास किया है.. ऐसा क्यों होता है? क्युकी हम सभी अपने चश्मे से दुनिया देखना पसंद करते है। इसलिए अधिकांश लोगों को सदैव सामने वाले से ही परिवर्तन की अपेक्षा रहती, न कि स्वयं से। किसी भी विषय को सीखने से पहले आपका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए कि आप क्यों सीखना चाहते है? कारण क्या है? आप इन प्रश्नों का तब ही उत्तर दे पाएंगे.. जब आप स्वयं गहराई से सबसे पहले को खुद जो जानेंगे। अपने इन्द्रियों पर अपना संयम स्थापित करेंगे।
स्वामी विवेकानंद जी ने आत्मनिरीक्षण को शिक्षा का प्राथमिक बिंदु माना।उनका मानना था कि व्यक्ति को सबसे पहले अपने विचारों, भावनाओं को गहराई से समझना चाहिए। जब आप स्वयं को गहराई से जानने के बाद अपने उद्देश्य और लक्ष्य को स्पष्ट करे। आत्म - अनुशासन के माध्यम से व्यक्ति जीवन के हर बड़े - बड़े उपलब्धि हासिल कर सकता है।
जब भी हम किसी विषय को पढ़ने से जाए.. शुरुआती समय में हमें 30 मिनट का लक्ष्य बनाना है। और इस 30 मिनट हमें यह सैदव याद रखना.. अपने लक्ष्य और अपने उद्देश्य को। एकाग्रता और दृढ़ता के साथ हमें किसी विषय को सीखना चाहिए।
उदाहरण : चलिए हम एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते है। भगवद गीता में श्री कृष्ण नें भी कहा.. कि मन बहुत चंचल है। मन का तीव्रता अत्यधिक है। लेकिन निरंतर प्रयत्न के माध्यम से हम अपने मन को अपने वश में कर सकते है।
विवेकानंद जी ने अपने जीवन में अनेक बार आत्मनिरीक्षण का अभ्यास किया। उन्होंने अपने आत्मनिरीक्षण और आत्म -अनुशासन से जीवन के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर खोजा। और सभी मनुष्य को अध्यात्मिक का मार्ग उन्होंने मार्गदर्शित किया।
2. सक्रिय सुनना और प्रश्न करना : आचार्य प्रशांत आज विश्व में अध्यात्मिक - सामाजिक जागरण की सशक्त आवाज़ है। वेदांत की प्रखर मशाल, अंधविश्वास व आंतरिक दुर्बलताओं के विरुद्ध मुखर योद्धा, पशुप्रेमी एवं शुद्ध शाकाहार के प्रचारक, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के पथप्रदर्शक मित्र उन्होंने कहा था...जब तक कोई विषय समझ में नहीं आये.. तब तक अड़े रहो.. और सीख कर ही मानो। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि अगर आप किसी विषय को सीखकर है.. तब विषय के बारे में गहराई से सीखे। प्रश्न पूछे। 
विवेकानंद जी किसी विषय को गहराई से पढ़ते और सीखते। विवेकानंद जी ने कहा था..  " एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ"
अगर आपको कोई विषय समझ में नहीं आये.. तब अपने शिक्षक से पूछे। अपने मन के शंका को दूर करे। यह बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है.. जितना आप प्रश्न पूछते है.. आपकी प्रखता और बुद्धिमत्ता निखरती है।
विवेकानंद जी अपने विचारों और अपनी शिक्षा को विश्व स्तर पर इसलिए रख पाए.. क्युकी स्वामी जी विषय को गहराई, रोचकता से समझते थे।
अगर हमें किसी विषय को शीघ्रता और अच्छे से याद रखना है.. तब हमें अपने जिज्ञासा और प्रश्न पूछने की कला को हमें जाग्रति रखना चाहिए।
उदाहरण : एक बार, विवेकानंद जी ने अन्य देश ( अमेरिका ) में उन्होंने लेक्चर दे रहे थे। उनका प्रभावशाली, उम्दा और रोचका से परिपूर्ण विचार सभी को बहुत अच्छा लग रहा था। लेक्चर( व्याख्यान ) के बाद, वहाँ मौजूद एक दर्शक ने उनसे एक बेहद ही दिलचप्सी और रोचक प्रश्न पूछा। स्वामी जी ने उनके प्रश्न को बहुत गहराई से समझा।उस व्यक्ति के प्रश्न के उत्तर को उन्होंने उम्दा और प्रभावित रूप से दिया।

3. व्यवहारिक ज्ञान : स्वामी जी किसी भी विषय को बहुत देर और शीघ्रता से इसलिए याद रख पाते थे.. क्युकी स्वामी जी किसी भी विषय जब पढ़ते थे.. तब वे इमेजिनशन की शक्ति अर्थात वे विषय को कल्पना करके पढ़ते थे।
उनका मानना था कि केवल किताबों से पढ़ने से ज्ञान प्राप्त नहीं होता, बल्कि व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से सीखना अधिक प्रभावी एवं उम्दा है।

आज के जनरेशन के पास अत्यधिक माध्यम से जिससे वे ज्ञान प्राप्त कर सकते है।और अच्छे से याद भी रख सकते है। पहले के समय में इंटरनेट का सुविधा नहीं था। आज इंटरनेट के माध्यम से पढ़े हुए विषय का रिवीज़न, प्रश्न इत्यादि सरलता से किया जा सकता है। मान लीजिये आज आपने विद्यालय में कोशिका को थ्योरी आधारित पढ़ा। और कुछ दिन बाद उसे आप भूल भी जा सकते है। लेकिन आप इंटरनेट के माध्यम से 3D एनीमेशन वीडियो, प्रॉपर रिवीज़न, विभिन्न महत्वपूर्ण प्रश्नों को हल कर सकते है।

नए - नए स्थान पर यात्रा करे। विवेकानंद जी ने अपने जीवन में अनेक यात्राएं की और विभिन्न संस्कृतियों और लोगों का अनुभव किया। विभिन्न देशों में यात्रा करके उन्होंने अनुपम अनुभव प्राप्त किया। अपने ज्ञान, लेखन और शिक्षा को उन्होंने पुरे विश्व के साथ साझा किया, जिससे लाखों - करोड़ों लोगों को प्रभावित किया। स्वामी विवेकानंद जी मात्र 39 वर्ष की उम्र में स्वर्ग चले गये। लेकिन अल्प आयु में उन्होंने अपने लर्निंग को पुरे विश्व में प्रसारित किया।
4. गुरु : हर किसी के जीवन में गुरु बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। फर्श से अर्श तक का रास्ता हमें गुरु ही दिखाते है। विवेकानंद जी अपने गुरु का बहुत सम्मान करते थे। उनका मानना था कि एक अनुभवी गुरु के उचित मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से जीवन में सबकुछ पाया जा सकता है।
हमें हमेशा अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए। उनके दिए हुए शिक्षा को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। 
तुलसीदास जी लिखते है.. अगर गुरु अंधा हो अर्थात अज्ञानी हो.. तो विद्यार्थी गुरु से भी ज्यादा अंधा अर्थात अज्ञानी होगा।
5. निरंतर : जीवन का नाम है निरंतर सीखते रहना। आप जीवन में जितना सीखेंगे..आप उतना विकास की राह पर अग्रसर होंगे।विवेकानंद जी नें जीवन भर सीखने पर बल दिया। उनका मानना था कि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है.. जो जीवन भर चलती रहती है। निरंतर सीखने से आपका कौशल, ज्ञान और क्षमता का विकास होता है।
6. संगति : जीवन में सही संगति से जीवन मनमोहक बन जाता है। जीवन सही दिशा की ओर अग्रसित होता है। हम जितना अच्छे लोगों के साथ रहेंगे.. उतना हमारा ज्ञान में वृद्धि होगा। इसलिए यह जरुरी है कि हमें अपने जीवन में सही लोगों को मित्र बनाना चाहिए। 
यह कुछ महत्वपूर्ण टिप्स है.. जिससे आप किसी  विषय को बहुत गहराई से सीख सकते है। आज हम सभी ने विवेकानंद जी के लर्निंग के मेथड को देखा। इसे जरूर हमें अपने जीवन में अप्लाई करना चाहिए।
धन्यवाद 
काजल साह
                             

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