प्रतिदिन जर्नल लिखने से मन एवं हृदय दोनों को शांति मिलता है, इसीलिए प्रतिदिन जर्नल लिखना चाहिए।आज इस निबंध मैं आप सभी के साथ साझा करूंगी कि प्रतिदिन जर्नल लिखने के क्या – क्या लाभ है?
1. व्यक्त: मन की बातों को व्यक्त करने के लिए प्रतिदिन जर्नल लिखना एक अच्छा जरिया है। बिना डरे,झिझके,एवं शर्म किए बिना मन में उत्पन्न हर विचारों को प्रतिदिन एक पन्नें में लिख सकते हैं। जर्नल लिखने के माध्यम से हम अपने विचारों को अच्छे से जान सकते हैं।
2. कमी एवं मदद:कई बार दुखी एवं कठिन के क्षणों में ऐसे व्यक्ति मौजूद नहीं होते है,जिससे हम अपने मन के विचारों एवं परेशानियों को उनके साथ साझा कर पाएं।मन की बातों को किसी करीब से शेयर करने से मन हल्का हो जाता है।
मन की बातों को स्वयं में दबाएं रखने से मन बहुत भारी हो जाता है। इसीलिए अनिवार्य है कि अगर कोई करीब हो या न हो अपने मन की हर बातों को लिखें अर्थात जर्नल लिखें, जिससे तनाव कम होता है एवं ऊर्जावान महसूस करते हैं , इसीलिए तनाव और चिंता में कमी लाने के लिए हमें प्रतिदिन जर्नल लिखना चाहिए।
3.समाधान एवं रचनात्मक:हिंदी एवं अंग्रेजी साहित्यों में अनेक ऐसे लेखक एवं कविजन हुए हैं,जिन्होंने अपने लेखन एवं कविताओं से समाज में बदलाव लाने का समग्र रूप से प्रयास किया है।वे कविता या कहानियां कवि या लेखक बनने के लिए नहीं लिखते थे,बल्कि मन में जो हलचल ,जो समस्या है और उसके समाधान ढूंढ़ने के लिए लिखते थे ।जब शांत मन एवं शांत वातावण में हम लिखते हैं,तब कई समस्याओं या उलझन का समाधान खुद – ब – ब हो जाता है।
लिखने से मन के साथ ही साथ क्रिएटिविटी में उन्नति होती है।अगर आप किसी अलग – अलग विषय पर प्रतिदिन लिखते हैं, तब सोचने का तरीका एवं दृष्टिकोण में विकास होता है। इसीलिए नियमित रूप से हमें लिखना चाहिए,जिससे कल्पना एवं क्रिएटिविटी मजबूत होती है।
तो आपने देखा ,प्रतिदिन लिखने के तीन प्रमुख लाभ है।उपरोक्त लाभ के अलावा अन्य लाभ है– भावनात्मक नियंत्रण में मदद,आत्म–संयम बढ़ता है,लक्ष्य निर्धारित करने में मदद मिलती एवं पूर्ण करने की प्रेरणा मिलती है इत्यादि।
विषय : खामोश
समय एवं मनुष्य की ऊर्जा उसकी सबसे बड़ी पूंजी हैं। इन दो सबसे महत्वपूर्ण पूंजियों को बर्बाद करना सबसे बड़ी मूर्खता है,जिसकी वजह से मनुष्य जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाता है।
कहां,कब और कैसे बोलना है,जिसने यह सीख लिया ,वह व्यक्ति को आगे बढ़ना कोई रोक नहीं सकता है।लेकिन आज लोग सुनना कम और बोलना अधिक पसंद करते हैं,जिसके वजह से आज रिश्तों में मिठास नहीं रहा और कई रिश्ते टूट भी जाते हैं। व्यर्थ की बातें करने वाले एवं जरूरत से ज्यादा बोलने वाले को लोग पसंद नहीं करते।अपने बातों को रखने में समय एवं ऊर्जा दोनों लगता है, इसीलिए हमें सोच – समझकर निर्णय लेना चाहिए।जिस प्रकार धन खर्च करने से पहले हम कई बार सोचते हैं कि गलत स्थान पर खर्च न हो जाएं,तब हम अपने समय एवं ऊर्जा को बर्बाद करने से पहले यह क्यों नहीं सोचते हैं? धन से भी सबसे कीमती समय एवं ऊर्जा है।धन वापस आ सकता है,लेकिन समय एवं ऊर्जा नहीं।
आज इस निबंध मैं एक महत्वपूर्ण निबंध जिसका शीर्षक है –, "खामोश रहने का अपना ही मज़ा है "
1.मानसिक: अस्थिर सबसे मन शत्रु है और स्थिर मन परम मित्र।खामोश रहने से मन शांत रहने लगता है ।शांत मन से मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।शांत मन हमें अवसर देती है,आत्मचिंतन का ।खामोश रहने से यह अर्थ नहीं है कि जहां गलत हो रहा है, वहां आवाज न उठाएं।बल्कि जहां जरूरी है,वहां हमें जरूर बोलना चाहिए।
2. भावनाओं: कई बार बिना सोचे –समझे बिना बोलने से कई बार भावनाओं को प्रकट कर देते हैं,लेकिन जब खामोश रहते है ( मौन –मुख एवं मन दोनों) तब हम भावनाओं पर भी नियंत्रण हासिल कर पाते हैं।
यह दो मुख्य फायदे हैं,खामोश रहने के।अगले निबंध में 2 मुख्य लाभ के अलावा क्या – क्या लाभ है,मैं आप सभी के साझा करूंगी।आशा करती हूं कि यह निबंध आपको अच्छा लगा होगा।
धन्यवाद
काजल साह
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