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28/04/2023 Dev Prakash Romance Views 145 Comments 0 Analytics Hindi DMCA Add Favorite Copy Link
दर्द दिया है अश्रु स्नेह है
दर्द दिया है अश्रु स्नेह है बाती बैरिन श्वास है
जल-जलकर बुझ जाऊँ मेरा बस इतना इतिहास है !

मैं ज्वाला का ज्योति-काव्य
चिनगारी जिसकी भाषा
किसी निठुर की एक फूँक का
हूँ बस खेल-तमाशा

पग-तल लेटी निशा भाल पर
बैठी ऊषा गोरी
एक जलन से बाँध रखी है
साँझ-सुबह की डोरी

सोये चाँद-सितारे भू-नभ दिशि-दिशि स्वप्न-मगन है
पी-पीकर निज आग जग रही केवल मेरी प्यास है !
जल-जलकर बुझ जाऊँ मेरा बस इतना इतिहास है !!
                             

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